इस राज्य में लोग केरल (Kerala) के बाद सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं. प्राकृतिक सुंदरता और मौसम इतना सुहाना रहता है कि कि कोई भी हो जाएगा निहाल
भारत के पूर्वोत्तर में स्थित मिजोरम को आज ही के दिन 1987 में 23वें राज्य का दर्जा मिला. 1972 में केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले तक ये असम का हिस्सा था. 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश प्रभाव बढ़ने के साथ मिजोरम 1891 में ब्रिटिश अधिकार में आ गया. इसके बाद कई वर्षों तक मिजोरम का उत्तर का लुशाई पहाड़ी क्षेत्र असम और आधा दक्षिणी भाग बंगाल के अधीन रहा. वैसे इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेने के लिए ब्रिटिश राज को नाको चने चबाने पड़े थे. यहां नागा विद्रोहियों से उनका लगातार संघर्ष चलता रहता था. 1750 से 1850 के बीच मिज़ो जनजाति के लोग पास के चिन हिल्स से आकर यहां बस गए थे. उन्होंने यहां के स्थानीय लोगों को अपने अधीन कर लिया. फिर समान जनजातियों ने एकजुट होकर अपना एक समाज बनाया. मिज़ो ने 300 वंशानुगत मुखियाओं के आधार पर एक स्वेच्छाचारी राजनीतिक प्रणाली विकसित की. 1826 में जब ब्रिटिश राज ने असम को हड़पा तो ये भी उनके कब्जे में आ गया. हालांकि इसके बाद कई दशकों तक ब्रिटिश क्षेत्रों में मिज़ो आक्रमण करते रहे. इसके कारण ब्रिटिश भी मिज़ो पर दंडात्मक हमले करते रहे.

प्राकृतिक रूप से ये बहुत सुंदर राज्य है. इसे अलग राज्य राज्य बनाने की मांग 1967 से ही जोर पकड़ने लगी थी. 1987 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया. अइजोल यहां की राजधानी है. यहां कुल आठ जिले हैं. इस पूरे राज्य में लोकसभा की केवल एक सीट है तो राज्यसभा की भी एक ही सीट है. हां. विधानसभा में 40 सीटें हैं. भारत में साक्षरता के मामले में आगे राज्यों में मिजोरम का दूसरा स्थान है. पहले नंबर पर केरल है. यहां खूबसूरत घुमावदार सड़कें और पहाड़ हैं. यहां चोरियां नहीं होतीं. आप अगर यहां यात्रा करें तो आपको कई जगहों पर सड़क किनारे ऐसी दुकानें दिखेंगी, जहां मौसमी फल और सब्जियां तो होंगी लेकिन कोई दुकानदार या दरवाजा नहीं. ये भरोसे पर चलती हैं. लोग यहां से सामान लेते हैं और पैसे रख जाते हैं. इन दुकानों पर सभी वस्तुओं की कीमत की सूची पहले से टंगी होती है. आपको बस यह करना है कि अपनी मनपसंद सब्जी या दूसरी सामग्री उठाइए और उसकी जो भी कीमत है उतने रुपये साथ वाले डिब्बे में डाल दीजिए. चोरी करने वाले परिवार को इतनी हिकारत से देखा जाता है कि इनका अपने आप ही सामाजिक बहिष्कार हो जाता है. मिजोरम में लगभग 87 फीसदी आबादी ईसाई धर्म को मानने वाली है. यह पूर्ण आदिवासी राज्य है. मिज़ोरम की तीन-चौथाई आबादी अपनी रोज़ी खेती से कमाती है. यहां सीढ़ीदार और झूम खेती दोनों ही की जाती है. खेती करने वालों की बढ़ती संख्या के कारण आठ साल का पारंपरिक झूम चक्र बहुत कम हो गया है. मिज़ोरम अपनी रेशेहीन अदरक के लिए मशहूर है. धान, मक्का, सरसों, गन्ना, तिल और आलू इस इलाके की प्रमुख फसलें हैं