चिराग, अजीत, शिंदे… 2024 से पहले NDA में इंद्रधनुष के रंग क्यों भरना चाहती है भाजपा
वैसे तो 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से भाजपा चुनाव जीतने वाली मशीन के तौर पर जानी जाने लगी लेकिन 2024 के समर में उतरने से पहले वह जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने तरकश में हर तीर रखना चाहती है। एनडीए की बैठक 18 जुलाई को होने वाली है और इसमें कई बड़े ऐलान हो सकते हैं।
नई दिल्ली,संकल्प सवेरा: 2024 का लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं। भाजपा संगठन में कई बड़े बदलाव कर रही है। कुछ घंटे पहले ही भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी की कुछ राज्य इकाइयों के पूर्व प्रमुखों समेत 10 नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य नियुक्त किया। इसी महीने में 18 जुलाई को एनडीए की बैठक बुलाई गई है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अजीत पवार के एनसीपी गुट और शिवसेना का शिंदे ग्रुप इस बैठक में हिस्सा ले सकता है। इस बात के भी पूरे संकेत मिल रहे हैं कि चिराग पासवान की वापसी के लिए भाजपा में मंथन चल रहा है। इस दिशा में संतोषजनक प्रगति भी हुई है
इतना ही नहीं, भाजपा लीडरशिप पहले ही सैद्धांतिक रूप से जेडीएस, ओम प्रकाश राजभर की ओबीसी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को साथ जोड़ने का फैसला कर चुका है। मछुआरों, किसानों और नाविकों की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी भी इस लिस्ट में आ गए हैं
अजीत पवार एनडीए में आते हैं तो प्रफुल्ल पटेल को राज्यसभा जाने का भी मौका मिल सकता है। एनसीपी में फूट से पहले सुप्रिया सुले के साथ प्रफुल्ल पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट के तौर पर काम कर रहे थे। 2024 के चुनाव के मद्देनजर भाजपा की नजर महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों पर है। ऐसे में वह सत्तारूढ़ शिवसेना समूह को भी एनडीए में जोड़ने को तैयार है।
पार्टी ने चिराग पासवान की भी ‘घर वापसी’ कराने का निर्णय लिया है। हो सकता है कि इससे उनके चाचा पशुपति कुमार पारस थोड़े नाराज हों। वह फिलहाल मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री का पद संभाल रहे हैं। बिहार की कुल आबादी में 4.5 प्रतिशत पासवान समुदाय है। चिराग के पिता और दलित नेता रामविलास पासवान भी एनडीए में रहे हैं। यही वजह है कि अगले चुनाव में जाने से पहले भाजपा ने काफी तौलकर यह फैसला लिया है
हाल में बिहार के एक और प्रभावशाली दलित नेता जीतनराम मांझी ने एनडीए में जंप लिया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि जेडीयू उनकी पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा का विलय करने पर दबाव बना रही है। सहन के साथी चर्चा और चिराग की वापसी के गणित को देखें तो भाजपा लोकसभा चुनाव के लिए ऊंची जातियों, गैर-यादव और गैर-कुर्मी ओबीसी और दलितों का इंद्रधनुषी गठबंधन बनाना चाहती है। कर्नाटक में वोक्लाकिगा समुदाय में पकड़ रखने वाली जेडीएस को भी साथ लाने की कोशिश इसी का परिणाम है।
यही नहीं, भाजपा अपने दो पूर्व सहयोगी दलों टीडीपी और शिरोमणि अकाली दल के साथ चर्चा कर रही है। बीजेपी को लगता है कि ऐसे समय में जब विपक्षी दल एक होने की कोशिश कर रहे हैं तो पर्सेप्शन की फाइट में एनडीए की मजबूती उसे चुनाव में ताकत देगी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई के आखिरी हफ्ते में एनडीए को मजबूत करने और उसका विस्तार करने की बात कही थी














