सावन सोमवार, शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त भूलकर भी न करें ये गलतियां
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का स्थान सबसे ऊपर आता है। शिवपुराण में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के कुछ नियम बताए गए हैं। इन नियमों में यह बताया गया है कि बेलपत्र को कैसे चढ़ाना चाहिए और इन्हें कब नहीं तोड़ना चाहिए। आइए सावन में ये नियम आप भी जान लीजिए
संकल्प सवेरा। सावन का शुभारंभ हो गया है और इस बार अधिक मास होने की वजह से सावन 59 दिनों का होगा। सावन में शिवजी का रोजाना जलाभिषेक करने और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के विशेष लाभ शिव पुराण बताए गए हैं। इसके साथ ही शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के कुछ नियम भी शास्त्रों में बताए गए हैं। इन नियमों को ध्यान में रखकर यदि आप शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाएंगे तो महादेव तक जल्द आपकी प्रार्थना पहुंचेगी और वह जल्द आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगे।
भूलकर भी शिवलिंग पर कटा-फटा बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से आपका बेलपत्र चढ़ाना व्यर्थ जाता है
भूलकर भी ऐसा बेलपत्र न चढ़ाएं जिसमें तीन से कम पत्ती हों। कम से कम तीन पत्ती वाला बेलपत्र शिवजी को चढ़ाना चाहिए। अगर आपको कहीं से 5 पत्ती वाला बेलपत्र मिले तो यह बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा बेलपत्र बहुत ही दुर्लभ होता है। इसे चढ़ाने से आपको मनचाहा फल प्राप्त होता है।
भगवान शिव को कभी भी खाली बेलपत्र न चढ़ाएं। बेलपत्र के साथ जल की धारा पर शिवलिंग पर जरूर होनी चाहिए और इसको चढ़ाते वक्त ऊं नम: शिवाय मंत्र का जप जरूर करते रहें
बेलपत्र को तोड़ते वक्त याद रखें कि इस दिन चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तथा संक्रांति तिथि नहीं होनी चाहिए। सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। सोमवार के व्रत के लिए एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़कर रख लें
यदि आपको पर्याप्त मात्रा में बेलपत्र नहीं मिल पा रहे हैं तो आप शिवलिंग पर चढ़े हुए बेलपत्र को स्वच्छ जल से धोकर फिर से चढ़ा सकते हैं। बेलपत्र को कभी अशुद्ध नहीं माना जाता है।
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बेलपत्र के बहुत से पत्तों पर धारियां होती हैं। ऐसे बेलपत्र को शिवजी पर चढ़ाने योग्य नहीं माना जाता है। ऐसे बेलपत्र को खंडित माना जाता है। सदैव जल चढ़ाने के बाद ही बेलपत्र चढ़ाएं














