मेडिकल स्कैम:घोटाला। हिंदुजा के डॉक्टर ने कहा जौनपुर के इस चिकित्सक का लाइसेंस जब्त व एफआईआर होनी चाहिए

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– हिंदुजा अस्पताल के डॉक्टर ने जौनपुर के एक धरती के कथित भगवान के पर्चे पर लिखा ” इस चिकित्सक का तो लाइसेंस जब्त व अस्पताल सीज़ करके उसके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए
-उसने यमराज के दूत की तरह मरीज़ को ऐसा डराया की बिस्तर से उठने तक की मनाही कर दी. भला हो उस मरीज़ के सम्बन्धी की जिसने मुंबई जाने की दी सलाह.
– वही पर्चा और जांच रिपोर्ट देख हैरत में पड़ गए हिंदुजा अस्पताल के चिकित्सक ने कहा कोई डॉक्टर अपनी कबाड़ मशीनों से मिली रिपोर्ट पर कैसे दवा देने और बिस्तर पकड़ने की सलाह दे सकता है.
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कैलाश सिंह
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वाराणसी,संकल्प सवेरा. दक्षिण भारतीय एक फिल्म में नायक पाँच रुपये वाला डॉक्टर के रूप में मशहूर होता है. टीवी इंटरव्यू में महिला पत्रकार नायिका के सवालों में से एक, सभी भारतीय का मुफ्त इलाज कैसे सम्भव है? के जवाब में नायक मौजूद दर्शकों से पूछता है कि यहाँ कितने लोगों को कोई बीमारी नहीं है, कृपया हाथ उठाएं तो सबने हाथ उठाए. नायक डॉक्टर ने कहा आप सभी एक बार मेडिकल चेकअप करा लीजिए, हैरत में पड़ जाएंगे खुद में अनगिनत बीमारियां पाकर. इंडिया में सबसे बड़ा मेडिकल स्कैम है,
यह बन्द हो जाए तो सभी मुफ्त इलाज पाएंगे. यह तो फिल्म का एक अंश है लेकिन मैं खुद हैरत में पड़ गया जब जौनपुर के एक डॉक्टर के पर्चे व रिपोर्ट पर हिंदुजा अस्पताल के डॉक्टर का लिखा देखा, उसमें साफ़ लिखा था की इस रिपोर्ट व पर्चे वाले डॉक्टर का प्रैक्टिस लाइसेंस जब्त कर मशीनों व अस्पताल सीज़ होना चाहिए. मरीज़ से कहा, आप स्वस्थ हैं, रोज़
टहलिए और जौनपुर के उस डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर जरूर करना. वह कथित मरीज मेरे मित्र निकले, उनका सज़रा सुनकर कई अन्य मरीजों के साथ हुई घटना याद आ गई।
वह यमराज रूपी डॉक्टर गोरखपुर- प्रयागराज़ हाईवे पर अपने यमराजपुरी नामक कथित अस्पताल में ऐसे ही मरीजों को डराता है. यह बड़े भू- माफिया में शुमार हैं. इसकी नामी, बेनामी जमीनों का लेखाजोखा अगले एपिशोड में. ये तो बानगी हैं. इस जिले में कई ऐसे हैं जिनके रेफर मरीज़ वाराणसी की सीमा भी नहीं छू पाते और स्वर्गवासी हो जाते हैं.
इनमें एक ऐसा है जो यमराजपुरी वाले डॉक्टर का प्रति स्पारधी है. दोनों में एक कथित वीआईपी के कुत्ते का इलाज करने को रेस लगती है की कौन पहले पहुंचे. ऐसे डॉक्टर आयकर के साथ जीएसटी भी मारते हैं. इनके कई मेडिकल स्टोर व अन्य केंद्रों पर बम्पर झोल है. ये सरकारी कारिंदों को ज़रखरीद गुलाम समझते हैं.
नए छोटे बड़े अधिकारी ज़ब नोटिस देते हैं तो वह खुद उनकी गोद से नहीं निकल पाते हैं. अलबत्ता अपने बड़े अफसरों को भी रकम के बिछावन पर बुला लेते हैं या विशेष गद्दा ही पहुंचा देते हैं. क्रमशः












