सनातन संस्कृति एंव दर्शन का विग्रह है कालजयी: नागेन्द्र प्रसाद
महाकवि रूपनारायण त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर कवि सम्मेलन आयोजित

जौनपुर,संकल्प सवेरा। कालजयी रचनाकार, पत्रकार महाकवि पं. रूपनारायण त्रिपाठी की 32वीं पुण्यतिथि पर रूप सेवा संस्थान एवं उ.प्र. भाषा संस्थान के तत्वाधान में गीत रूप नमन समारोह एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहाकि स्व. त्रिपाठी की रचनाएं सार्वभौतिक एवं सार्वकालिक है।
इनमें भारतीय संस्कृति के उदात्त मूल्य निहित है। जीवन मूल्यों को उकेरने वाली स्व. त्रिपाठी की कविताओं से नयी पीढ़ी को अवगत कराया जाना चाहिये। जिलाधिकारी अनुज झा ने संबोधन में कहाकि स्व. त्रिपाठी शीर्षस्थ रचनाकार होने के साथ-साथ इस जनपद की पहचान भी है।
राज्यसभा संसद सीमा द्विवेदी ने कहाकि पं. रूपनरायण त्रिपाठी की कविताओं से राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रेरणा लेनी चाहिये। इनकी रचनाएं हमें मानवीय मूल्यों के प्रति सजग करती है। वरिष्ठ साहित्यकार एंव पूर्व कुलपति राममोहन पाठक ने कहाकि स्व. त्रिपाठी की कविताएं मानवीय मूल्यों को समर्पित है जो प्लेटो के आदर्शों केा चुनौती देती है। लोकसेवा आयोग के सदस्य प्रो. आरएन त्रिपाठी नेकहाकि स्व. त्रिपाठी की कविताएं अत्यंत लोकप्रिय है।
सांसद श्याम सिंह यादव ने कहाकि कवि सदैव समाज को जोड़ने का काम करता है। स्व. त्रिपाठी की कविताओं में गंगा-जमुनी तहजीब की छाप दिखायी देती है। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहाकि पं. रूपनारायण त्रिपाठी की रचना कालजयी भारतीय सनातन संस्कृति एंव दर्शन का विग्रह है। द्वितीय चरण में कवि सम्मेलन का शुभारंभ पं. हरिराम द्विवेदी ने विघन धन अन गिनत नभ में जतन कर तुम टार दे।मां शारदे मां शारदे से किया।
सम्मेलन में धर्म प्रकाश मिश्र, प्रियांशु गजेन्द्र, श्लेष गौतम आदि कवियों ने अपने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि से.नि. आईएएस नागेन्द्र प्रसाद ने दृष्टि दोष शीर्षक कविता प्रस्तुत कर लेागांे को सोचने के लिये विवश कर दिया। समारोह में अतिथियों एवं कवियों को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम् प्रदान कर सम्मानित किया गया। अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. राममोहन त्रिपाठी, संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर, आगन्तुकों का अभिवादन प्रबंधक रामकृष्ण त्रिपाठी तथा आभार ज्ञापन लोकेश त्रिपाठी ने किया।












