आलू के फसलों को पाले के प्रकोप से बचाएं:कृषि वैज्ञानिक सुरेंद्र सोनकर

संकल्प सवेरा,जौनपुर। वायुमंडल का तापमान जब 4 सेंटीग्रेड से कम होता है तो पाले पड़ने की संभावना बनी रहती है पाला पत्तियों पर जाकर जम जाता है जिसकी वजह से पत्नियों की नस फट जाती है बदलते मौसम में पाले का सबसे अधिक प्रकोप आलू पर होता है
जबकि चना सरसों अरहर और सब्जियां भी पारले के प्रभावित होती हैं कृषि विज्ञान बक्शा जौनपुर के वैज्ञानिक डॉ राजीव कुमार सिंह ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि शीतलहर में आलू की फसल पर पाला पड़ने से पाला झुलसा रोग होता है जिससे बचाव के लिए गंधक का छिड़काव उपयोगी होता है गंधक फसल की सुरक्षा का आवरण होता है
600 से 800 ग्राम घुलनशील गंधक को 300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करना फायदेमंद होता है थायो यूरिया का 0.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से भी पाला से काफी हद तक पशुओं को बचाया जा सकता है पाले से बचाव के उपाय भी हैं जिसमें फसल के 50 से 60 दिन की अवस्था में प्रति एकड़ 10 से 12 किलोग्राम लकड़ी का राख छिड़काव कर अपने फसलो को बचा सकते हैं
देसी गाय का मूत्र 1 लीटर 15 से 20 लीटर पानी में मिलाकर शाम के समय छिड़काव करें जहां पर खेतों का क्षेत्रफल कम है वहां मध्यरात्रि में के बाद मेड के ऊपर उत्तर दिशा पश्चिम की तरफ घास फूस आदि जलाकर धुवा करें हालांकि या पर्यावरण की दृष्टि से उचित नहीं है
पर इसे पाले से बचाव में सहायता मिलती है जैविक तरीके से पहले के नियंत्रण के लिए 500 ग्राम सुडोमोनाश फ्लोरोसेंस का प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें पाला से बचाव के लिए 10 दिन के अंतर पर हल्की सिंचाई करें आलू के खेत में नमी बनाए रखना अति आवश्यक होता है












