नशीली दवाओं की खेंप से पटा बाजार, विभाग वसूली में लिप्त
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योगी सरकार की मंशा पर पानी फेरने में लगे हैं ड्रग विभाग के इंस्पेक्टर और बाबू
जेड़ हुसैन बाबू
संकल्प सवेरा,जौनपुर। प्रतिबंधित और नशीली दवाओं के रोक के लिए सरकार लाख कोशिशे कर लें लेकिन विभाग के लोगों पर इसका रत्ती भर भी असर नहीं देखने को मिल रहा है।
सरकार की मंशा के उलट बाजार में प्रतिबंधित और नशीली दवाओं का बाजार गरम है और विभाग के जिम्मेदार अपने निजी हित के लिए सबकुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं। जिले में नशील और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री जोरों पर है। विभाग की दयादृष्टि से यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है। सूत्रों से पता चला है कि ड्रग विभाग के इंस्पेक्टर से लेकर बड़े बाबू तक मलाई काट रहे हैं।
सूत्रों की माने तो ड्रग इंस्पेक्टर बाकायदा वसूली के लिये अलग से मनबढ़ युवकों को अपने पास रखे हुए है जो साहब को पूरे जिले की खबर दिया करते हैं। सैकड़ों युवा इसकी जद में आकर अपनी जिंदगी खराब कर रहे हैं लेकिन विभाग को तो इसकी कोई परवाह नहीं। विभाग के कर्मचारी सिर्फ वसूली में लिप्त हैं। जो दवा बीमारी से निजात दिलाने के लिए बनाई गई है। उसका उपयोग अब युवाओं द्वारा नशे के लिए किया जा रहा है।
नशे के लिए अब पान, बीड़ी, सिगरेट और शराब के अलावा कम खर्च में नशीली दवा सीरप और इंजेक्शन का उपयोग अधिक हो रहा है। मेडिकल स्टोर वाले अपने थोड़े से फायदे के लिए बिना डाक्टर की पर्ची देखे ही ये नशीली दवाएं अवैध रूप से बेंच रहे हैं।
जबकि सरकार ने ऐसी दवाओं की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। युवकों में दिन-ब-दिन नशे को लेकर झुकाव बढ़ता जा रहा है। शराब, सिगरेट, गांजा के साथ अब नशे के लिए युवा नए-नए तरीके भी इजाद कर रहे हैं। दर्द और एलर्जी से राहत दिलाने के लिए बनाई गई दवाइयों को उपयोग युवा वर्ग नशे के लिए करने लगा है।
पेंटविन इंजेक्शन, कोरेक्स सीरप और स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल का नशे के लिए उपयोग किया जा रहा है। नशे के ये सामान मेडिकल स्टोर में 2 रुपए से लेकर 15 रुपए में आसानी से मिल जाते हैं। स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल पेट दर्द से राहत की दवा है। इसकी कीमत 2 रुपए है। युवा एक साथ चार से पांच कैप्सूल खाकर इसका उपयोग नशे के लिए कर रहे हैं।
इसके अलावा पेंटविन इंजेक्शन लगाकर भी युवा वर्ग नशा कर रहा है। दो रुपए के इंजेक्शन को दस रुपए में बिक्री कर मेडिकल स्टोर के संचालक चांदी काट रहे हैं। नशे के लिए युवा स्पाजमो प्राक्सीवान, एंटी एलर्जिक टेबलेट एविल, नारफिन एंपुल, नाइट्रोसीन टेबलेट, आयोडेक्स व कोरेक्स सीरप का भी उपयोग कर रहे हैं। इनमें से नारफिन व नाइट्रोसीन को तो प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिर भी ये मेडिकल स्टोर्स में मिल जाते हैं।
रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में भटकने और कबाड़ बीनने वाले बच्चों को बोनफिक्स सूंघने की लत लग गई है। निमेस्यूलाइड यह प्रतिबंधित दवा है, इसके बावजूद बिक रही है. यह दर्द, शोथ व बुख़ार के लिए दी जाती है।
ड्रग इंस्पेक्टर ऐसे विशेषज्ञ होते हैं जो किसी दवा की सुरक्षा, उपयोगिता प्रदर्शन और उसके निर्माण के समय से लेकर रिटेल आउटलेट में बेचे जाने तक उसकी निरंतरता की निगरानी करते हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर, जिन्हें गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक के रूप में भी जाना जाता है, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि दवाएं मानव उपभोग के लिए उपयुक्त हैं कि नहीं। इसके ठीक उलट विभाग अब सिर्फ वसूली में लिप्त है।












