संकल्प सवेरा। जो जीवन देते हैं उनका जीवन लेते,
महामंद हो कुंद हुई अब तेरी बुद्धी।
पंचतत्व से निर्मित यह अपनी काया है,
जीवन रक्षण करना तो कर इनकी शुद्धी।
वायु प्राण है जल है जीवन
रक्षण कर पा ले संजीवन
व्योम स्वच्छ हो वह्नि प्रज्वलित
मृदा सुगन्धित धरा पल्लवित
नेह प्रकृति से स्नेह प्रकृति का
मन्त्र यही सनातन संस्कृति का
वन वनस्पतियों से युक्त रहे
सब प्राणी भय से मुक्त रहे
प्रकृति माता सी स्नेह करे
जन जन से वह तो नेह करे
ऋषियों की संतानें होकर कैसी बुद्धी कुंद हुई है
वेदों का भी गान किया फिर भी बुद्धी मन्द हुई है
जो जीवन देते है कर तू उन का रक्षण
उनके ही मिस तू कर अपना संरक्षण।।
डॉक्टर रामजी तिवारी












