तंबाकू सेवन से होता है मुख, फेफड़े का कैंसर : सीएमओ
विश्व तंबाकू निषेध दिवस
-विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर सीएमओ कार्यालय सभागार में हस्ताक्षर अभियान व गोष्ठी
-जिला चिकित्सालय में स्थित तंबाकू उन्मूलन केंद्र तंबाकू सेवन से मुक्त होने में करता है मदद
जौनपुर,संकल्प सवेरा। विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर सोमवार को सीएमओ डॉ लक्ष्मी सिंह की अध्यक्षता में हस्ताक्षर अभियान एवं गोष्ठी का आयोजन हुआ। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएमओ ने तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक किया।
उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन से कई प्रकार की बीमारियां होती हैं। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। तंबाकू के सेवन से मुख व फेफड़े का कैंसर, बीपी, शुगर, नपुंसकता आदि बीमारियां होती हैं। लोगों में अपंगता भी आती है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हो जाती है। उन्होंने बताया कि सभी प्राथमिक (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), उपकेंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जागरूकता कार्यक्रमों तथा शपथ का आयोजन किया गया है।
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ राजीव कुमार ने बताया कि 15 मई से 15 जून तक तंबाकू निषेध माह मनाया जा रहा है। इस दौरान जनपद के सभी विभागों की जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने विभागों में तंबाकू निषेध पर चर्चा करायें। जनहित में उसका प्रचार-प्रसार करायें। हर सप्ताह स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग के लोग सार्वजनिक जगहों पर छापेमारी करें। अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध जुर्माना लगायें। ब्लॉक स्तरीय चिकित्सालयों में हर दिन आने वाले मरीजों/तीमारदारों को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों की जानकारी दें।
उन्होंने कहा कि इस दिन का मुख्य उद्देश्य तम्बाकू व अन्य माध्यमों से तंबाकू सेवन के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना है। धूम्रपान से छुटकारा पाने में धूम्रपान करने वालों की मदद करना है। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय में तंबाकू उन्मूलन केंद्र कार्यरत है जो लोगों को तंबाकू सेवन से मुक्त होने में मदद करता है।
एसीएमओ डॉ नरेन्द्र सिंह ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन हर वर्ष इसकी थीम तैयार करता है। इस वर्ष की थीम पर्यावरण बचायें निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष 60 करोड़ पेड़ों को काटकर सिगरेट बनाया जाता है। तंबाकू जनित उत्पादों से आठ करोड़ चालीस लाख टन कार्बन डाई आक्साइड गैस निकलती है जिससे वायुमंडल का तापमान बढ़ता है। इतना ही नहीं सिगरेट बनाने में लगभग 22 अरब लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। इससे न केवल पर्यावरण को खतरा होता है बल्कि बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी होती है। एनजीओ कार्यकर्ता मुन्नी बेगम ने बताया कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी नशा छोड़ सकता है। कार्यक्रम के अंत में एसीएमओ डॉ सत्य नारायण हरिश्चंद्र ने लोगों को अभियान में सच्चे मन से भाग लेने के लिए शपथ दिलाई। कार्यक्रम में कुंवर हरवंश सिंह पैरामेडिकल की छात्र/छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ एससी वर्मा, डीपीएम सत्यव्रत त्रिपाठी, एफएलसी जयप्रकाश गुप्ता, विनोद मोर्या तथा एनसीडी सेल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।












