भाजपा सरकार में पत्रकारों पर कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण – शिव प्रसाद अग्रहरी
यूपी व एमपी में पत्रकारों के साथ हुए पुलिसिया कार्रवाई पर जताया गहरा खेद,
पत्रकारों के कलम को रोकना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान
सिकरारा। पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी है, जो विभिन्न मुद्दों व समस्याओं को लेकर शासन प्रशासन को जगाने का कार्य करते रहते हैं। ऐसे में अगर देश के किसी भी हिस्से में पत्रकारों के साथ सरकार व प्रशासन तंत्र द्वारा किसी भी तरह का अभद्र व्यवहार व मारपीट की घटना सामने आती है तो कष्ट होना लाजमी है। क्योंकि शासन सत्ता अगर भ्रष्टाचार व अपराध जैसे कार्यों को बढ़ावा देगी तो मीडिया उसे उजागर करने का कार्य अवश्य करेगा। ऐसे में किसी भी सत्ताधीशों को पत्रकारों द्वारा छापे गए समाचार पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया में विगत दिनों बोर्ड परीक्षा के दौरान जिस तरह से पेपर लिक का प्रकरण कुछ मीडिया कर्मियों द्वारा अपने अखबारों में छापा गया और उस पर जिला प्रशासन ने जिस तरह से एक्शन लिया वह बहुत ही दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। उक्त बातें उत्तर प्रदेश किसान एवं खेत मजदूर कांग्रेस कमेटी वाराणसी के पूर्व मंडल महासचिव व युवा समाजसेवी शिव प्रसाद अग्रहरी ने क्षेत्र के गुलजार गंज बाजार में पत्रकारों से एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि आज लगभग 2 सप्ताह से बलिया का प्रकरण पूरे प्रदेश में गूंज रहा है। जिसे लेकर अधिवक्ता संघ, पत्रकार संघ, छात्र संघ, मजदूर संघ, व्यापारी संगठन सहित सभी पत्रकारों की रिहाई के लिए कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन शासन प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं दे रहा है। इस स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि शासन की मंशा है कि वह भ्रष्टाचारियों को बचाते हुए सच्चाई छापने वाले पत्रकारों को फर्जी मुकदमे लादते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेजें। दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी तक इस घटना पर उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने संज्ञान नहीं लिया। बलिया प्रशासन की इस कार्रवाई ने जहां पत्रकारों के अधिकारों का हरण किया है वही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भी प्रहार किया है। अब यह अलग बात है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी इस घटना पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं यह तो वही जान सकते हैं, लेकिन एक बात तो जरूर है कि आज इस कार्रवाई के बाद से पत्रकारों के कामकाज को लेकर एक भय कायम हो गया है। इसके अलावा एमपी में इससे बड़ी दुखद घटना पत्रकारों के साथ घटाई गई, जहां पर पुलिस थाने में समाचार कवर करते समय पुलिस कर्मियों द्वारा उन्हें घसीटते हुए ले जाकर लॉकअप में बंद कर दिया गया और उनके कपड़ों को उतरवाकर नग्न फोटो वायरल कर दी गई। यह घटना अपने आप में दुर्भाग्यपूर्ण है ऐसे अधिकारियों को सस्पेंड नहीं उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर देना चाहिए।
आज देश भर में मीडिया पत्रकारों को लेकर जिस तरह से कहीं-कहीं प्रशासन द्वारा उनके कामकाज को रोकने, उनके साथ अभद्र व्यवहार करने को लेकर मुहिम चलाया जा रहा है। वह एकदम दुर्भाग्यपूर्ण है और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ मजाक है। इस पर प्रदेश की सरकारों के साथ साथ केंद्र सरकार को भी जागना होगा और पत्रकार की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने होंगे।












