जौनपुर की नौ विधानसभा सीटों की चुनावी नतीजे अब सामने लगे हैं। जिले की मल्हनी सीट एक बार फिर पूर्व सांसद धनंजय सिंह के कारण चर्चा में रही। मल्हनी सीट से सपा प्रत्याशी लकी यादव ने जदयू से मैदान में उतरे धनंजय सिंह को 16711 मतों से पछाड़ा।
2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के कद्दावर नेता पारसनाथ यादव ने धनंजय को हराया था। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भी धनंजय को पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा।
शुरुआती रुझानों में धन्नंजय सिंह ने समाजवादी पार्टी के लकी यादव को पीछे छोड़ा था। मगर दोपहर बाद वो पिछड़ गए। मल्हनी सीट को पूर्वांचल की हॉट सीट का तमगा मिला था। यहां खुद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने लकी यादव के लिए वोट मांगे थे। मल्हनी के अलावा वे सिर्फ अखिलेश यादव की सीट करहल ही गए थे।
पूर्वांचल की सबसे हाट सीट मल्हनी पर सबकी नजर थी। दिनभर हर कोई इस सीट के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश में लगा था। शुरुआत में जेडीयू प्रत्याशी और पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने जबर्दस्त बढ़त बनाई लेकिन बाद में लकी यादव ने उन्हें पीछे कर दिया और आखिर में लगातार बढ़त बनाते हुए दूसरी बार इस सीट से विधायक बने। इसके पहले, उनके पिता पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय पारसनाथ यादव लगातार दो बार विधायक रह चुके हैं। इस सीट को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी थी। मतदान के दिन जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव की अगुवाई में एक बड़ी टीम क्षेत्र में लगा दी। स्थिति यह रही कि सातवें चरण में सपा ने ही इस सीट पर सबसे ज्यादा फर्जी वोटिंग की शिकायत निर्वाचन आयोग से की थी। 
2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के कद्दावर नेता पारसनाथ यादव ने धनंजय को हराया था। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भी धनंजय को पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा।
शुरुआती रुझानों में धन्नंजय सिंह ने समाजवादी पार्टी के लकी यादव को पीछे छोड़ा था। मगर दोपहर बाद वो पिछड़ गए। मल्हनी सीट को पूर्वांचल की हॉट सीट का तमगा मिला था। यहां खुद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने लकी यादव के लिए वोट मांगे थे। मल्हनी के अलावा वे सिर्फ अखिलेश यादव की सीट करहल ही गए थे।
पूर्वांचल की सबसे हाट सीट मल्हनी पर सबकी नजर थी। दिनभर हर कोई इस सीट के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश में लगा था। शुरुआत में जेडीयू प्रत्याशी और पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने जबर्दस्त बढ़त बनाई लेकिन बाद में लकी यादव ने उन्हें पीछे कर दिया और आखिर में लगातार बढ़त बनाते हुए दूसरी बार इस सीट से विधायक बने। इसके पहले, उनके पिता पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय पारसनाथ यादव लगातार दो बार विधायक रह चुके हैं। इस सीट को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी थी। मतदान के दिन जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव की अगुवाई में एक बड़ी टीम क्षेत्र में लगा दी। स्थिति यह रही कि सातवें चरण में सपा ने ही इस सीट पर सबसे ज्यादा फर्जी वोटिंग की शिकायत निर्वाचन आयोग से की थी। 












