नई दिल्ली,संकल्प सवेरा । नई शिक्षा नीति लागू करने की दिशा में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने अहम पड़ाव पार कर लिया है। शुक्रवार को डीयू की कार्यकारी परिषद ने नई शिक्षा नीति के आधार पर तैयार स्नातक पाठ्यक्रम को सर्वसम्मति से पास कर दिया। इसके लिए कुल 335 सुझाव आए थे। शैक्षणिक सत्र 2022-23 में दाखिला लेने वाले छात्र नए पाठ्यक्रम से ही पढ़ाई करेंगे। कार्यकारी परिषद के तीन सदस्यों अशोक अग्रवाल, राजपाल सिंह और सीमा दास ने पाठ्यक्रम के मसौदे का विरोध किया। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम 176 क्रेडिट स्कोर, जबकि तीन वर्षीय पाठ्यक्रम 132 क्रेडिट स्कोर का होगा
छात्र माइनर विषयों में भी स्नातकोत्तर कर सकेंगे। यही नहीं, डिग्री पर भी मेजर और माइनर अंकित होगा। इससे छात्रों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। नए पाठ्यक्रम में इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट आदि पर अधिक ध्यान दिया गया है। अभी तक छात्रों को इंटर्नशिप का मौका पांचवें-छठे सेमेस्टर में मिलता था। लेकिन, अब तीसरे, चौथे, पांचवें या अन्य सेमेस्टर में इंटर्नशिप समेत प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे। नए पाठ्यक्रम में छात्रों को पढ़ाई बाधित होने के बाद दोबारा दाखिले का विकल्प मिलेगा
यदि कोई छात्र निश्चित विषयों, जैसे- बीए इंग्लिश, बीकाम, बीएससी फिजिक्स पढ़ता है। छात्र संबंधित विषय में (18 डिसिप्लीन स्पेशिफिक कोर्स और दो डिसिप्लीन स्पेशिफिक इलेक्टिव कोर्स की पढ़ाई के साथ) कम-से-कम 80 क्रेडिट प्राप्त करता है, तो संबंधित विषय की डिग्री प्रदान की जाएगी
यदि कोई छात्र कोर कोर्स के रूप में एक से अधिक डिसिप्लीन से पढ़ाई करता है। मसलन- बीए इन सोशल साइंस/ह्यूमिनिटी, बीएससी इन लाइफ साइंस। तो ऐसे में छात्रों को मल्टीडिसिप्लिनरी बैचलर डिग्री प्रदान की जाएगी
यदि कोई छात्र रिसर्च के साथ आनर्स करना चाहता है तो उसे छठे या सातवें सेमेस्टर में शोध क्रियाविधि पाठ्यक्रम लेना अनिवार्य होगा।
प्रत्येक छात्र को अनिवार्य रूप से पर्यावरण विज्ञान और सतत विकास पाठ्यक्रम पढ़ना होगा
पढ़ाई के दौरान कालेज बदलना होगा आसान, विकल्प अधिक मिलेंगे
अन्य विवि से पढ़ाई के बाद डीयू से पढ़ाई करने की चाह रखने वाले छात्रों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी
मैकाले की गुलामी भरी मानसिकता से ग्रस्त शिक्षा से मुक्ति के लिए कुलपति प्रो. योगेश सिंह के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। स्नातक पाठ्यक्रम प्राचीन भारत की श्रेष्ठ परंपरा के साथ आधुनिकतम ज्ञान विज्ञान के तत्वों से लैस है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी साकार कर सकेगा। -प्रो. निरंजन कुमार, डीन प्लानिंग, डीयू












