।। मां सरस्वती ।।
विद्या की देवी हैं, सुरों की जननी हैं ।
हंस वाहिनी कहते हैं जिसे, वह माँ सरस्वती हैं ।।
सब के दिलों में राज करती, सबसे ऊपर विराजती हैं।
सबको मानवता का ज्ञान सिखाती हैं ।।
वह मां सरस्वती हैं ।।
हाथों में वीणा लेकर, मुकुट सिर पर धारती है ।
वह श्वेत वर्णी, मां सरस्वती हैं।।
ऋषियों की बातें हो, या मुनियों की ज्ञानी हो ।
सबको तुमने ही सीखाया , चाहे वह कितना ही ज्ञानी हो।।
वह मां सरस्वती हैं ।।
सबको देती ज्ञान तू, अज्ञानता से तारती हैं ।
मायाजाल के भंवर से, हमें वह तारती हैं ।।
वह मां सरस्वती हैं ।।
देखकर ज्ञान हमें, जो ज्ञानी बनाती है ।
बुद्धि विवेक से परिपूर्ण हमें, वह बनाती हैं। ।
वह मां सरस्वती हैं। ।
द्वापर हो या त्रेता हो , हो चाहे सतयुग या कलयुग।
हर जगह हर समय पूजी जाती हैं वह, चाहे कोई भी हो युग।।
वह मां सरस्वती हैं।।
हाथों में जो कमल लिए, मुख पर जिसके तेज हैं।
एक हाथ में किताब है तो , दूजे में जिसके मानवता का संदेश है। ।
वह मां सरस्वती हैं।
शत शत नमन है मां तुझे, तूने हमें बोलना सिखाया।
कोटि-कोटि नमन है, जो तूने हमें ज्ञान दिया।।
वह मां सरस्वती है।।
विजयलक्ष्मी विनय तिवारी
मुंबई












