संकल्प सवेरा जौनपुर। विधानसभा चुनाव से पहले फरवरी में शहर के पंचहटिया में निर्माणाधीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के चालू हो जाने की संभावना है। इससे पहले, शहर के हयानपुर नाला से गोमती में गिरने वाले आठ एमएलडी गंदा पानी को शोधित करने का कार्य किया जाएगा। इसके बाद जुलाई तक पूरी सीवर पाइप डालकर सभी नालों से गोमती में गिरने वाले गंदा पानी को शोधित करने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी जोरशोर से तैयारी शुरू कर दी है।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 28 एमएलडी गंदा पानी निकालता है, जो विभिन्न नालियों और नालों से होकर आदि गंगा गोमती नदी में गिरता है। इससे गोमती का पानी भी दूषित हो रहा है। इस दौरान गोमती का पानी दूषित न हो और शहर से निकलने वाले गंदा पानी को शोधित कर अन्य प्रयोग में लाया जा सके, इसके मद्देनजर सरकार ने नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत एसटीपी का निर्माण करने का निर्देश दिया था। इन दोनों योजनाओं के तहत कुल मिलाकर 470.80 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई थी।
इसमें नमामि गंगे योजना के तहत 206.05 करोड़ की धनराशि से 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी और तीन पंपिंग स्टेशन और अमृत योजना के तहत 264.77 करोड़ की धनराशि से 159 किमी सीवर पाइप और एक पंपिंग स्टेशन बनाया जाना है। एक पंपिंग सेट की क्षमता लगभग 12 एमएलडी की है। इसके निर्माण का कार्य अक्तूबर 2019 से शुरू किया गया था, जिसे दिसंबर 2021 में पूरा किया जाना था, लेकिन पूरा नहीं हो पाई। इसके बाद तिथि बढ़ाकर जुलाई 2022 कर दी गई है।
साथ ही एसटीपी की कार्यदायी संस्था भी बदल कर उसके निर्माण की जिम्मेदारी गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी को सौंपी गई है। कार्यदायी संस्था की मानें तो उसके ओर से हयानपुर नाला से गोमती नदी में गिरने वाले गंदा पानी को शोधित करने का कार्य किया जाएगा, जिसके बाद अन्य नालों से गोमती में गिरने वाले गंदा पानी को भी जुलाई में सीवर पाइप डालकर शोधित करने का कार्य किया जाएगा।
14 बड़े नालों से गोमती में गिरता है गंदा पानी
जौनपुर। शहर से रोजाना निकलने वाला गंदा पानी कुल 14 नालों से होकर गोमती नदी में गिरता है, जिसमें हनुमान घाट, बजरंग घाट, बलुआ घाट, मछरहट्टा, मियांपुर, कटघरा, नखास, अहियापुर, जेसिज, मुफ्ती मोहल्ला सहित अन्य नाला है, जिनसे आने वाले गंदा पानी को एसटीपी में शोधित कर खेतों की सिंचाई सहित अन्य उपयोग में लाया जाएगा।
वर्जन
एसटीपी निर्माण का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। इसे फरवरी में चालू कर दिया जाएगा। पहले हयानपुर नाला से गोमती में गिरने वाले आठ एमएलडी गंदा पानी को शोधित करने का कार्य किया जाएगा। शेष नालों के गंदा पानी को जुलाई तक सीवर पाइप डालने का कार्य पूरा करने के बाद शोधित करने का कार्य किया जाएगा। – संजय कुमार वर्मन, प्रोजेक्ट मैनेजर, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई वाराणसी साभार अमर उजाला जौनपुर












