💐💐।। बिहारियों का हठ,अंतर्राष्ट्रीय बना छठ ।।💐💐
संकल्प सवेरा। लोक परंपरा का पर्व है छठ, माना जाता है कि इसकी शुरुआत बिहार से हुई और धीरे धीरे पूरे विश्व में फैल गई।
————-सूर्य उपासना की परंपरा वैदिक काल से है, बताया जाता है कि सुर असुर संग्राम में जब देवता हारने लगे तो सूर्य उपासना करके शक्तिशाली पुत्र की प्राप्ति की और असुरों का नाश किया। भगवान कृष्ण के बेटे शाम्ब को कुष्ठ रोग हो गया तो उन्होंने सूर्य उपासना की। कर्ण सूर्य भक्त थे, बताया जाता है रोज घण्टो पानी मे खड़े होकर सूर्य की उपासना और अर्घ देते थे।
——-द्रौपदी ने पांडवों के राज पाठ वापस पाने के लिए भी छठ का ब्रत रखा था,छठी माता को सूर्य का बहन माना जाता है, उनको प्रसन्न करने के लिए सूर्य भगवान की पूजा की जाती है, सभी देवदाताओ में अकेले सूर्य भगवान दृश्य होते हैं, माना जाता है कि इनके ही प्रकाश से धरती पे जीवन चल रहा है।
———-सूर्य भगवान की दो पत्नियां थी उषा और प्रत्युषा, दोनो समय पूजा करके उन शक्तियों की भी आरधाना की जाती है। इस पर्व का वैज्ञानिक महत्व भी है, इस समय खगोलीय परिवर्तन होता है, ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य की किरणों इस दिन ऐसे कोण से आती है कि पानी में शरीर के रहने से उनका गुणकारी प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पैरावैगनी किरणों हानिकारक प्रभाव से जल में रहने से कम असर होता है।
———यह लोकमहत्व का त्योहार विहार का पर्व नही उनकी संस्कृति है, जिसमे ना किसी पण्डित की जरूरत, ना किसी धर्म ग्रन्थ में लिखे नियम की जरूरत, बस आपस मे मिलकर, उनके सहयोग से अपने बनाये गए नियम के आधार पर पूजा की जाती है। चार दिन का कठिन व्रत अकेला व्रत है जो पर्यावरण की रक्षा करता है, नदियों, तालाबो के पानी से लेकर, साफ सफाई तक। कृषि प्रधान और कृषि आधारित समाज के महत्व को ये अकेला त्योहार उन चीजों को अपने सर पर रख कर उनके महत्व को दर्शाता है। विभिन्न सब्जियों से लेकर फल, गन्ना और सब चीजों का महत्व इस पूजा में जितना मिलता है और कही नही दिखता।
——–घर परिवार को सुखी, सम्पन्न, सामाजिक एकता का प्रतीक यह पर्व अकेले विहारी लोगो के हठ के चलते आज पूरे विश्व की निगाह में आ गया है, जब आधुनिकता की इस दौड़ में लोग आधुनिक और फैंसी ठंग से अपना पर्व मनांते है उस समय में भी बिहारी भाई बहनों ने इस लोक आस्था के पर्व को अपने पुराने रूप में ही मनाना शुरू किया,
चाहे इसके लिए उन्हें मुम्बई के जुहू बीच पे इकट्ठा होना पड़े, या लंदन की टेम्स नदी में कूद के खड़ा होना पड़े कभी संकोच नहीं किया, अब तो बिहारी न्यूयॉर्क में भी गड्ढा खोद देते हैं।
———लोक आस्था के इस पर्व पे ठेर सारी बधाइयां, अब तो बहुत लोग इसको मनाने लगे, लेकिन अपनी लोक परम्परा को किस तरह डंके की चोट पे मनाना चाहिए इसको बिहारी लोगो से सीखना चाहिए, बिहार के लोगो की बहुत से हरकतों पे हसने वाले लोग भी जब इस कठिन व्रत को इतनी आस्था और शिद्दत के साथ मिल के करते देखते हैं तो हैरत में पड़ जाते हैं, सरकारें भी हैरान होकर ब्यवस्था में लग जाती है, ये पर्व अपना आकार इतना बड़ा करने लगा है कि अब तो अवकाश घोषित कराने लगा है।
——जय हो छठ माता की, सबको निरोगी, सम्पन्नन और खुशहाल रखे यही कामना है
साभार
।। अजित सिंह के FB wall से












