राम वनगमन देख सजल हो गये नयन
रघुकुल रीति सदा चलि आयी, प्राण जाय पर,,,,,
संकल्प सवेरा गभिरन ( जौनपुर) आदर्श रामलीला धर्ममण्डल समिति शहाबुद्दीनपुर उसरौली के द्वारा शुक्रवार की रात राम वन गमन की लीला का सजीव मंचन किया गया। रघुकुल रीति सदा चलि आयी, प्राण जाय पर बचन न जायी, के सिद्धान्तो पर चलने वाले महाराज दशरथ इधर गुरु वशिष्ठ से सलाह मशविरा कर राम के राज तिलक की तैयारी का आदेश दे रहे है।
उधर बिधना के विधान को कुछ और ही मंजूर था। जिसे राजा बनना था, वो तपसी वेश में वन को चला गया। अपने बचन का पालन करते हुए महाराजा दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग दिए। जिसे देख दर्शक शोकातुर हो गए। वहीं भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता को तपसी वेश में वन जाते देख दर्शकों की आंखें छलक पड़ी।
रामलीला का शुभारंभ बदलापुर बिधायक रमेश मिश्र ने फीता काटकर कर किया। उन्होंने कहा कि खुद का अहंकार मानव का सबसे बड़ा शत्रु है। हमें रामलीला से सीख लेनी चाहिये कि रावण सा पंडित और शूरवीर योद्धा संसार में दूसरा नहीं हुआ।
लेकिन उसे भी खुद के अहंकार ने नष्ट कर दिया। इसके बाद भी हम यदि धन, पद और योग्यता पर अहम करते है तो इसका परिणाम अवश्य ही विनाशकारी होगा। इस अवसर पर राम लीला के प्रबन्धक राधेश्याम उपाध्याय , इंद्रापति पाण्डेय, देवी प्रसाद पाण्डेय, ईशनारायण पाण्डेय, ओम प्रकाश पाण्डेय मुन्ना, कमलेश पाण्डेय, अरविन्द तिवारी , अजय जी महाराज, हमेश चन्द्र पाण्डेय, सहित अन्य पदाधिकारी एवं दर्शक मौजूद रहे।












