महायोजना का अस्तित्व न खत्म कर दे मास्टर प्लान
मानचित्र अस्वीकृत स्थानों पर तनती जा रही है बिल्डिंग
मामले में इजाफा, निस्तारण शून्य
महर्षि सेठ
संकल्प सवेरा,जौनपुर। इन दिनों मास्टर प्लान कार्यालय अपने क्रिया कलापों से चर्चा में बना हुआ है। नगर में पार्क एरिया सहित पुरातत्व, रेलवे की भूमि, धार्मिक, नजूल, लघु उद्येग की जमीनों पर मास्टर प्लान के रहमों करम से अवैध निर्माण जोरों पर चल रहा है। झील व नदियों का किनारा पहले ही पाटा जा चुका है। अब भू माफियाओं की निगाह महायोजना में चिन्हित प्रतिबंधित स्थानों पर भी पड़ रही है। वैसे तो यह विभाग पहले भी भरष्टाचार में संलिप्त रहा है लेकिन इन दिनों दिन दोगुना, रात चौगुनी तरीके से प्रतिबंधित स्थानों पर भू माफियाओं द्वारा निर्माण कार्य किया जा रहा है। इन मामलों में मास्टर प्लान के अधिकारी मलाई काट रहे हैं,

जब मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचता है तो विभाग अपना कोरम पूरा करते हुए संबंधित को नोटिस जारी कर कटघरे में खड़ा कर देता है। बावजूद इसके अवैध निर्माण पर किसी प्रकार से विराम नहीं लगता बल्कि विभाग की ऊपरी कमाई बढ़ जाती है। जिससे नियत प्राधिकारी बेखबर हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अवैध निर्माणों में एरिया वाइस रेट तय है। जबकि महायोजना अर्न्तगत आने वाले क्षेत्र जैसे ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल, पार्क, खुले स्थान, नगर स्तरीय पार्क, क्षेत्रीय पार्क, हरित पट्टी, नदी तटीय, बाढ़ प्रभावित रेलवे भूमि,
कृषि क्षेत्र आदि की भूमि पर कोई भी मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकता लेकिन महायोजना के इन नियमों को ताख पर रखकर वर्तमान जेई धन उगाही में लिप्त होकर राजस्व को क्षति पहुंचा रहे हैं। प्रमाण के तौर पर वर्तमान में सिपाह रेलवे क्रासिंग से सटे निर्माण प्रबंधित पार्क एरिया में निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। इसी क्रम में सिपाह स्थित पुरातत्व धरोहर झझरी मस्जिद शाही किला के समीप स्थित, सिटी स्टेशन, वाजिदपुर तिराहा,

बड़ीमस्जिद सहित अन्य स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहा है। स्थानीय लोगों से जानकारी हुयी कि जितने भी प्रतिबंधित स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहे हैं वहां मास्टर प्लान विभाग के नुमाइंदे जाते हैं और कार्य रोक देते हें। उसके बाद कुछ दो चार दिन के भीतर वहां निर्माण कार्य दोगुनी रफ्तार से पुन: चालू हो जाता है।
वही लोगों ने यह भी बताया कि विभाग से सेटिंग कर किसी भी स्थान पर कोई भी निर्माण कार्य कराया जा सकता है। साहब का सुविधा शुल्क उन तक पहुंंचाने के बाद उस स्थान पर वो झांकने तक नहीं जाते। यदि कोई अपनी बात उच्चाधिकारी तक पहुंचाता है तो पार्टी का काम रूकता नहीं और नोटिस जारी हो जाती है जिससे आये दिन न्यायालय में फाइलें मोटी होती जा रही है

और निस्तारण शून्य है। पहले ही महायोजना में चिन्हित लगभग 50 प्रतिशत स्थानों पर भू माफियाओं का कब्जा हो चुका है। अगर समय रहते प्रशासन न चेता तो वह दिन दूर नहीं जब महायोजना का अस्तित्व खत्म हो जायेगा।












