संकल्प सवेरा जौनपुर कोशिश की मासिक काव्य-गोष्ठी मनीषी बाल विद्या मंदिर के प्रांगण में वरिष्ठ कवि पूर्व प्रवक्ता नवोदय विद्यालय श्री राम जीत मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित हुई।
सरस्वती वंदना के पश्चात शशांक मिश्र की कविता –मेरे राम कहां हो तुम–देश में व्याप्त भय,भूख और भ्रष्टाचार पर प्रहार करती लगी।अमृत प्रकाश का शेर–फ़ानी दुनिया से भाग हिम्मत कर/अपने किरदार की मरम्मत कर–टूटते मानव मूल्यों की कहानी कह गया।एसो.प्रोफेसर अजय विक्रम की कविता–मै क्या लिखूं–नारी विमर्श पर केंद्रित रही तो वहीं अंसार जौनपुरी का शेर–आई है गुलिस्तान में कैसी बहारे नौ/दम घुट रहा है ताजा हवा चाहिए मुझे/समाज में व्याप्त घृणा की ओर संकेत किया। जनार्दन अष्ठाना का गीत—गगन से बरस रहा रसधार, बूंदों की धारा लगती है चांदी की दीवार, श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रखर ने सवाल किया–बताओ पीड़िता का नाम क्या था/
सीता, मरियम या आया/तो राजनीति कैसे बांटती समाज को इसका ज्वलंत उदाहरण सामने आ गया। रामजीत मिश्र का शेर—डरता हूं कोई अपना कहीं रूठ न जाते/भांडा बना मुश्किल से कहीं फूट न जाए, पारिवारिक बिखराव की ओर इशारा कर गया।प्रो.आर.एन.सिंह का मुक्तक——आज नहीं तो कल निकलेगा,हर मुश्किल का हल निकलेगा, तुम्हे अकेले चलना होगा,
साथ जमाना चल निकलेगा,
समय की आवश्यकता की ओर संकेत कर गया।
अशोक मिश्र की कविता—-शब्द चुप्पी साध ले तो कौन बोलेगा/रौशनी के लिए खिड़की कौन खोलेगा/कलमकारों के सामने आने वालीं चुनौतियों का चित्रण लगी। गोष्ठी में दूरभाष से गिरीश ने मुक्तक पढ़ा—जब भी लेती नदी है अंगड़ाई/सारे तटबंध टूट जाते हैं/प्रकृति के भयावह स्वरूप का सजीव चित्रण उपस्थित हो गया।
गोष्ठी में श्री अनिल उपाध्याय,नंद लाल समीर, रमेश चंद्र सेठ, बजरंग प्रसाद एडवोकेट, सुशील दूबे,संजय सागर,आलोक सिन्हा, रूपेश साथी, फूलचंद भारती की प्रस्तुति बहुत सराही गई। आभार श्री मती दमयंती सिंह जी और राजेंद्र सिंह एडवोकेट ने प्रकट किया।
संचालन अशोक मिश्र ने किया।












