एआरटीओ कार्यालय में होता है “खेला”
चली-चला की बेला में कई कर्मचारी दोनों हाथों से बटोर रहे पैसा
पैसे का झोला उठाने के लिए रखे गए हैं मुस्टंडे
मुख्यमंत्री की मंशा पर बट्टा लगा रहे हैं ए आरटीओ विभाग के कर्मचारी
जेड हुसैन (बाबू)
संकल्प सवेरा,जौनपुर। जिले का एआरटीओ कार्यालय हमेशा से सुर्खियों का मरकज़ रहा है। सुर्खियों में हो भी क्यों न पैसा यहीं बरसता है। आलम ये है कि शाम को जाते समय पैसो का झोला उठाने के लिए बाकायदा मुस्टंडे नियुक्त हैं?
सूत्रों की मानें तो लर्निंग लाइसेंस की फीस 400 है लेकिन 600 रुपया वसूला जाता है। परमानेंट फीस लगभग 1 हज़ार है लेकिन 21 सौ देने के बाद ही आपको लाइसेंस मिल पायेगा। ये तो रही दुपहिया वाहन के लाइसेंस बनवाने की बात अब इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि चार चक्का वाहन या उससे बड़े वाहनों पर कितना पैसा लिया जाता होगा।
विभाग में जितने कर्मचारी हैं उससे ज्यादा दलालों की तादाद है, इन दलालों के सिर पर संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों का हाथ होता है।
एक दलाल ने ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि साहब यहाँ रोज़ लाखों का खेला होता है? मौजूदा समय में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि हमारे राज्य में सुशासन हो लेकिन ए आरटीओ विभाग के कर्मचारी मुख्यमंत्री की मंशा पर बट्टा लगा रहे हैं। अगर इन बेलगाम कर्मचारियों पर लगाम नही कसी गई तो आये दिन गरीब जनता इनका शिकार होती रहेगी।
अक्सर ये देखने को मिलता है कि लाइसेंस बनवाले को लेकर दलालो और लोगों में विवाद होता है। शिकायत होने पर खानापूर्ति के लिए आला अधिकारी जांच भी करते है लेकिन भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई न जाने क्यों कमजोर पड़ जाती है।
अगर इस विभाग के कर्मचारियों की सीबीआई या उससे निचले स्तर की जांच एजेंसियों से जांच करा दी जाए तो निश्चित ही कई कर्मचारी आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जेल की सलाखों में होंगे। अभी तक ये सवाल, सवाल ही है कि क्या सच में सुशासन आएगा?












