संकल्प सवेरा,प्रयागराज. कोरोना की वैश्विक महामारी के चलते सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षायें रद्द किए जाने के फैसले के बाद यूपी बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा (Class 12 रद्द करने का भी दबाव बढ़ गया है. हांलाकि सीबीएसई बोर्ड ने ही सबसे पहले 10वीं की बोर्ड परीक्षा निरस्त करने का फैसला लिया था, जिसके बाद कोरोना संक्रमण को देखते हुए देश के कई अन्य राज्यों के परीक्षा बोर्डों ने भी दसवीं और बारहवीं की परीक्षायें निरस्त करने का फैसला लिया है. वहीं, अब सीबीएसई बोर्ड द्वारा मंगलवार को बारहवीं की परीक्षायें निरस्त करने के फैसले के बाद यूपी बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा को रद्द करने की भी मांग तेज होने लगी है. यूपी बोर्ड के बारहवीं के परीक्षार्थी भी कोरोना के चलते ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से कम तैयारी और कोरोना संक्रमण की आशंका को देखते हुए परीक्षा न कराए जाने की मांग कर रहे हैं. वहीं, शिक्षाविद् भी योगी सरकार से परीक्षा रद्द कर आन्तरिक मूल्यांकन के आधार पर ही बच्चों को पास करने की बात कह रहे हैं. यूपी बोर्ड की पूर्व उप सचिव भावना शिक्षार्थी के मुताबिक बच्चों की सेहत और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बारहवीं की बोर्ड परीक्षा भी तत्काल सरकार को रद्द कर देना चाहिए. उनके मुताबिक सरकार अगर परीक्षा न कराने का जल्द फैसला लेती है, तो इससे बच्चों और अभिभावकों के बीच बोर्ड परीक्षा को लेकर जो संशय बना हुआ है वह दूर होगा. वहीं, बच्चे भी मन लगाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे.उनके मुताबिक जिन बच्चों ने बोर्ड परीक्षा की बेहतर ढ़ंग से तैयारी की है, उन्हें भी परीक्षा रद्द होने से कोई खास नुकसान नहीं होगा, क्योंकि उनके शिक्षक उनकी योग्यता और क्षमता से बखूबी वाकिफ होते हैं और उन्हें आन्तरिक मूल्यांकन में उनके पर्फामेंस के आधार पर अच्छे अंक ही मिलेंगे.इसके साथ ही उनकी तैयारी भी प्रतियोगी परीक्षाओं में उन्हें सफलता दिलायेगी.












