“एहसास मन के”
किताबों के पन्ने पलट कर ये सोचते हैं।
यूं ही पलट जाए जिदंगी तो क्या बात है।
तमन्ना पूरी हो जो ख्वाबों में,
हकीकत बन जाएं तो क्या बात है।
वक्त बेवक्त कभी खुद से मिल जाए तो क्या बात है।
लोगो कभी बिना कुछ कहे बात को
समझ ले तो क्या बात है ।
वक्त के परो में जंजीरे बांध के,
वो हसीन पल फिर मिल जाए तो क्या बात है।
सब के लबो की हंसी हम बन जाए तो क्या बात है।
जीते जी खुशी दुंगी सब को मेरे मरने पर किसी को खुशी मिल जाए तो क्या बात है।













