।। संकल्प सवेरा।।
व्यर्थ शिक्षा
व्यर्थ शिक्षा दे दे कर देश के युवा को
मानसिक विकलांग बना कर घर बैठा दिया
न रोजगार मिला न किसान बन सके युवा
समाज व देश पर बेरोजगारी का कलंक लगा दिया
व्यवसायिक शिक्षा ही दे देते तो आज युवा
घर–परिवार चला पाते, दो वक़्त की रोटी कमा लाते
लेकिन शिक्षा को व्यापार बनाकर तुमने
समाज को मुर्ख और युवा को बेरोजगारी थामा दिया
अपने जीवन का पन्द्रह-सोलह बरस
हर युवा ने व्यर्थ शिक्षा में लूटा दिया और
तुमने उनको एक-एक पाई का मोहताज बना दिया
पिता की आय, जमापूंजी को शिक्षा में लगवाकर
उनके बच्चों को बेरोजगार बना घर बैठा दिया
युवाओं को शिक्षा के नाम पे ये कैसा जहर पिला दिया
जो जवान होते ही परिवार संभाल लेते थे उन युवा को
व्यर्थ शिक्षा दे देकर बुद्धि से ही अपाहिज बना दिया
हाय ये कैसी शिक्षा और शिक्षा-व्यवस्था तुम्हारी
शिक्षा पाने वाले निकम्मे लाचार बीमार हो रहे
और विद्यालय चलाने वाले को मालामाल बना दिया
शिक्षा के नाम पे समाज में ये कैसा विष फैला दिया
आखिर क्यों व्यर्थ शिक्षा दे दे कर समाज में
युवा और शिक्षा का तुमने मजाक बना दिया
लेखिका- डॉ सरिता चंद्रा
बालको नगर कोरबा (छ. ग.)













