संकल्प सवेरा
कृष्ण की रसमाधुरी,
शिव का तांडव लिखूँ,
स्त्री तुझे मैं क्या लिखूं.
शब्द का भंडार लिख दूँ
विश्व तारणहार लिख दूँ
प्रकृति का प्रारब्ध लिख दूँ
प्रेम का प्राकट्य लिख दूँ
वेद का अध्याय लिख दूँ
स्त्री तुझे मैं क्या लिखूँ
व्योम को मातृत्व लिख दूँ
धैर्य धरती का लिखूँ
जो क्षुधा को तृप्त करती
अन्न का भंडार लिख दूँ
मुक्ति की गंगा लिखूँ मैं
शास्त्र में गीता लिखू
मृत्यु से तुझे मोक्ष लिख दूँ
स्त्री तुझे मैं क्या लिखूँ
दक्ष की दक्षायनी
वैदेही विदेह की लिखूँ
हिम की दुलारी मैं लिखूँ
शिव की पियारी मैं लिखूँ
अनसूया का तप लिखूँ
लच्छमीबाई का रण लिखूँ
स्त्री तुझे मैं क्या लिखूँ
ममता का आँचल लिखूँ
मातृत्व का विराम लिख दूँ
शैल सा संकल्प लिख दूँ
पूर्णता का पर्याय लिख दूँ
करुणेश्वरी, मातेश्वरी,प्राणेश्वरी
तुझे क्या लिखूँ
तू रहेगी अपरिभाषित
मैं तुझे कितना लिखूँ..
कृष्ण की रासमधुरी
शिव का तुझे तांडव लिखूँ
स्त्री तुझे मैं क्या लिखूँ…..
प्रतिमा मिश्रा ,प्रयागराज..












