वशिष्ठ नारायण सिंह
लेखक वरिष्ठ सामाजवादी चिंतक और टिप्पणीकार है।
जौनपुर । शानदारी से इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने वाला जनपद जौनपुर अपने हाल पर आंसू बहा रहा है जनपद का कोई ऐसा कोना नहीं बचा है जहां पर सामाजिक और प्रशासनिक उत्पीड़न से कोहराम ना मचा हो सरेआम दबंगई सीनाजोरी आम बात हो गई है।
प्रशासनिक लूट खसोट बेमानी, घूसखोरी और पक्षपात पूर्ण ब्याहार शासन तंत्र का मौलिक अधिकार बन चुका है? सरकारी दफ्तरों के चौखट पर पहुंचते ही फरियादियों को एक लाश समझकर भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी चील और कौवा की तरह झपट्टा मारने लगते हैं किसी भी प्रकार का विरोध करने पर वे भ्रष्ट लोग एक ऐसा कार्ड दिखाते हैं जिस पर घूस लेना इनका अधिकार और घूस देने देना फरियादी का कर्त्तव्य लिखा हुआ होता है? दुख इस बात का है कि बेबस और लाचार जनता जब किसी रहनुमा की खोज करती है तो कोई दूर दूर तक दिखाई नहीं पड़ता है।
सहज और सरल जनता जाने अनजाने में किसी नेता या अधिकारी के दरवाजे पर पहुंचता है तो उसे यह देखकर दुख और आश्चर्य होता है कि यहां पर नेताओं और अधिकारियों का जूठन चाटने वाले चाटुकार भ्रष्ट लोगों की भीड़ जमा हुई रहती है? विगत कई वर्षों से हमारे जनपद का यही हाल बना हुआ है? भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों दलाल किस्म के राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मूर्ख बेईमान नेताओं के लिए हमारा जिला एक चरागाह बन गया है? प्रेम सहिष्णुतासे आपसी सद्भाव मेल-जोल एकजुट होकर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करने की सुखद अनुभूति से हमेशा चहकने और दमकने वाला हमारा जौनपुर हताशा और निराश होकर अपने भाग्य पर रो रहा है, ऐसी स्थिति और परिस्थिति में बेबस और लाचार जनता छात्र नौजवानों की तरफ आशा भरी नजरों से देख रही है।
छात्र नौजवान किसी भी जाति संप्रदाय के घेरे में बधे नहीं होते है नौजवानों का संघर्ष मय इतिहास कितना ही शानदार रहा है, नौजवानों की अंगड़ाई ने बड़े से बड़े भ्रष्टाचारियों और तानाशाह को उखाड़ फेंकी है। इतिहास वर्धमान को पहचान देखकर भविष्य पर कब्जा करने के लिए ललकार रहा है। नौजवानों को इस बात का इल्म होना चाहिए कि यदि लोकतंत्र मरेगा तो हम भी तिल तिल कर मरेंगे । नौजवानों को बस इतना ही आगाह कर देना ही काफी होगा कि हर शाख पर उल्लू बैठा है न जाने गुलिस्ता क्या होगा।
वशिष्ठ नारायण सिंह
लेखक वरिष्ठ सामाजवादी चिंतक और टिप्पणीकार है।












