हिंदी भाषा देश की गरिमा व अस्मिता की प्रतीक है।सोशल मीडिया व बाज़ार ने अपनी आवयश्कता के अनुरूप हिंदी को अधिक संप्रेषणीय बनाया है।बोलने के लिहाज़ से यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा है।
उक्त बातें पं.दीनदयाल उपाध्याय बालिका इंटर कॉलेज रुस्तपमुर की प्रधानाचार्या व लेखिका प्रिया पांडेय ने कही।उन्होंने बताया कि हिंदी के शब्द अंग्रेजी के शब्दकोष में अपनी जगह बना रहे हैं।इससे पता चलता है कि वैश्विक पटल पर हिंदी भाषा की स्वीकार्यता बढ़ रही है।
लेखिका प्रिया पांडेय ने कहा कि हिंदी वैश्विक संवाद की भाषा बनने की तरफ़ कदम बढ़ा रही है इसलिए यह संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनने की हकदार है।हिंदी की लिपि वैज्ञानिक है इसलिए यह सबसे प्रामाणिक भाषा है।उन्होंने बताया कि प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था इसीलिए इस दिन को ‘विश्व हिन्दी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।आपको बता दें कि वर्ष 2006 के बाद से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी का आयोजन विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करने के लिए किया जाता है।












