काशी।
प्लास्टिक जितना पर्यावरण के लिए घातक है उतना ही अधिक पृथ्वी की उर्वरता शक्ति को भी कमजोर करती है,उसे बंजर बना देती है।
उसके लिए प्लास्टिक का उपयोग जितना कम से कम किया जा सके उतना ही पर्यावरण के लिए संजीवनी साबित होगी।प्रमिलादेवी फाउंडेशन द्वारा गंगा घाट के उस पार महिलाओं के बीच इको ब्रिक बनाने की विधि का डेमो दिया गया और उन्हें जागरूक किया गया कि घर से निकलने वाली प्लास्टिक को एक प्लास्टिक के बोतल में भर कर उसे किस तरह से उपयोग में लाया जा सकता है।
फाउंडेशन की अध्यक्ष पायल सोनी ने बताया कि गंगा के इस पार कई पर्यटक घूमने आते है और प्लास्टिक के बोतल और चिप्स के पैकेट यही फेंक देते है अगर उस खाली प्लास्टिक के बोतल और पैकेट को कूड़ेदान में या अपने ही बैग में वापस डाल कर घर ले आये तो घाटों को गंदा होने से 100 फीसदी रोका जा सकता है। साथ ही अगर उसे इको ब्रिक का रूप दे दिया जाए तो हम इसे कई जगह उपयोग कर सकते है।
जैसे-सजावटी सामान बनाने,गुलदस्ते बनाना,शौचालय की दीवार,चबूतरा,सोफा,मूढा इत्यादि आसानी से बनाया जा सकता है। प्रमिलादेवी फाउंडेशन ने पिछले महीने ही इको ब्रिक बैंक का उद्घाटन भी किया है जिसमे मातृ शक्तियों को शामिल किया गया है।इको ब्रिक जागरूकता कार्यक्रम में प्रीति जायसवाल,आरती,रचना,
नीतू जायसवाल,शाम्भवी मिश्रा,तान्या जायसवाल के साथ कई महिलाओं और बच्चों की उपस्थिति रही।
धन्यवाद
मिथिलेश सोनी
मीडिया प्रभारी
प्रमिलादेवी फाउंडेशन
वाराणसी












