जौनपुर का एक गाँव सहोदरपुर। यह गाँव जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम की तरफ बसा है। थाना महाराजगंज के अंतर्गत आने वाले इस गांव की कई विशेषताएं हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं की पहले सहोदरपुर गांव पूरी तरह से वन क्षेत्र था। 1895 में बगल के गांव बिरसादपुर के ग्रामीण सहोदरपुर क्षेत्र में गए और वहां रहने लगे। धीरे-धीरे वहां गांव बस गया । वर्तमान में गांव की कुल आबादी ढाई हजार है, जिनमें पंद्रह सौ मतदाता है।
गांव के नजदीक स्थित तेजी बाजार गांव की सभी जरूरत की वस्तुओं को पूरा करता है । सहोदरपुर गांव को लेकर एक किदवदंति भी प्रचलित है, स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वर्षों पहले नट समुदाय से संबंधित एक पहलवान गांव में रहते थे । जो स्थानीय अन्य पहलवानों के साथ कुश्ती करते थे। एक बार ऐसी ही एक कुश्ती के दौरान नट पहलवान ने ठाकुर समुदाय से संबंध रखने वाले पहलवान विजयी सिंह को हरा दिया ।
इस कुश्ती के दौरान विजयी सिंह गंभीर रूप से चोटिल हो गए थे, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के उपरांत ग्राम वासियों ने उनके मृत्यु स्थल पर एक छोटा सा स्मारक बना लिया और वहां पूजा पाठ करने लगे। कालांतर में स्थल “पकड़ी बाबा” के नाम से ग्राम वासियों द्वारा जाना जाने लगा। उनकी यह मान्यता थी की “पकड़ी बाबा” के स्थल पर पूजा पाठ करने और प्रसाद में धतूरा चढ़ाने से बाबा प्रसन्न होते हैं और सभी बुरी शक्तियों से उनकी रक्षा करते हैं।
मुंबई महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह इसी गांव से संबंधित है। आज उन्ही के कारण इस गाँव की विशेष पहचान है। गांव के युवक कृपाशंकर सिंह को अपना आदर्श मानते हैं । आजादी के बाद के पंचायत चुनाव में कृपाशंकर सिंह के पिता स्वर्गीय श्री राम निरंजन सिंह निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने जाते थे। उनके जीवनकाल में ग्राम वासी उन्हें लगातार ग्राम प्रधान बनाते रहे थे।
वहीं कृपाशंकर सिंह ने वर्ष 1972 में अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी कर मुम्बई की ओर का रुख किया। मुम्बई में संघर्षों की शुरुआत में उन्होंने एक साधारण स्तर की शुरुआत की । उन्होंने केमिकल ऑपरेटर की नौकरी की रोज फार्मेसी और एएएफडी फार्मा कम्पनी में काम किया । नौकरी के दौरान ही उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा आरंभ किया । मुम्बई में आयोजित नेत्र शिविर के एक कार्यक्रम में आपकी अति संक्षिप्त मुलाकात इंदिरा जी से हुई और आप उस मुलाकात से अत्यंत प्रभवित हुए ।
आप पार्टी में पहले से ही एक कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे थे किंतु 1977 में इंदिरा गांधी जी की गिरफ्तारी के बाद से वह कांग्रेस में पूर्णरूपेण सक्रिय हो गए। तालुका और जनपद स्तर पर युवक कांग्रेस और सेवादल में एक कार्यकर्ता के रूप में कांग्रेस को अपनी सेवाएं देते हुए आप प्रदेश कांग्रेस कमेटी में नियुक्त हुए।तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने आपकी प्रतिभा को पहचाना और आपको महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन सचिव का गुरुत्तर दायित्व सौंपा।
आप 1991 तक मुंबई स्थित एक औषधि निर्माता कंपनी रोस में केमिकल ऑपरेटर के पद पर कार्य करते हुए राजनीति में सक्रिय थे। राजीव जी की हत्या के बाद आपने नौकरी छोड़ दी और पूर्णरूपेण देश और कांग्रेस के लिए समर्पित हो गए। उन्होंने उत्तर भारतीयों के लिए व्यापक स्तर पर संघर्ष किया । उनका मिलनसार व्यक्तित्व और जनता के लिए उनकी उपलब्धता यही कारण रहे, जो बहुत जल्द उत्तर भारतीयों में उनकी लोकप्रियता को शिखर पर ले गए
। उन्होंने कई बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव और उपाध्यक्ष के दायित्वों का निर्वहन किया। पहली बार एमएलसी चुने गए और उसके बाद लगातार तीन बार विधायक भी निर्वाचित हुए। स्वर्गीय विलासराव देशमुख की महाराष्ट्र सरकार में कृपाशंकर जी गृहराज्य मंत्री रहे। उनका सम्मान सभी पार्टियों के नेता करते हैं। मुंबई में सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त करने के बावजूद गांव से उनका जुड़ाव व लगाव हमेशा बना रहा। मोतीलाल वोरा वहां के राज्यपाल रहे हो या सपा की सरकार में शिवपाल यादव मंत्री रहे हो, उनसे गाँव के विकास के लिए विभिन्न मांग और विकास के लिए पहल करते रहे हैं।
एक लोकप्रिय नेता के रूप में गाँव के विकास के लिए पक्की सड़कों से गांव को जोड़ना रहा हो अथवा अन्य संसाधनों के विकास रहे हो, उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हमेसा रही है । कृपाशंकर सिंह गाँव मे जरूरतमंदों को समय-समय पर दवाइयों एवम आवश्यक वस्तुओं के साथ ही ठंड के मौसम में कंबल वितरण का कार्यक्रम करते रहते हैं । वर्तमान में वह गांव में एक आधुनिक अस्पताल बनवाने के लिए प्रयासरत हैं। क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों व जुड़ाव के कारण स्थानीय ग्रामीण उनसे बेहद प्रभावित रहते हैं और उन्हें अपने एक आदर्श के रूप में देखते हैं।
सहोदरपुर ग्राम पंचायत के क्षेत्राधिकार में तीन मौजा आते हैं । सहोदरपुर, खमपुर, दांदूपुर। इस ग्राम सभा के अंतर्गत तीन मंदिर, दो प्राइमरी स्कूल, एक मिडिल स्कूल के साथ ही एक निजी कान्वेंट स्कूल भी है । कृषि के लिए सिंचाई व्यवस्था की बात करें तो गोमती और सई इन दोनों नदियों के बीच बसे इस गाँव में सिंचाई की कोई असुविधा नहीं है, नहर और पम्पिंग सेट से किसान अपनी पानी की जरूरतों को पूरा करते हैं। गांव में 56 एकड़ में बना एक तालाब भी है, जिसमें आज भी कमल के फूल खिलते हैं ।
ग्राम सभा में ठाकुर, ब्राम्हण, हरिजन, सरोज, कहार, शर्मा, विश्वकर्मा, गुप्ता, और 3 मुस्लिम परिवार आपस में बड़े सौहार्द से रहते हैं । अधिकतर ग्राम वासियों की आजीविका का साधन कृषि और श्रम कार्य है। देश की सुरक्षा के लिए भी गांव का अपना योगदान है । देश की सुरक्षा के लिए गांव की तरफ से एक व्यक्ति सूबेदार, दो व्यक्ति केंद्रीय रिजर्व पुलिस में उपनिरीक्षक है ।
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभालने के लिए गांव से चार लोग यूपी पुलिस में उप निरीक्षक और एक कांस्टेबल के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं । वहीं विदेश की धरती पर गांव के आजाद सिंह कृषि वैज्ञानिक के रूप में अमेरिका में कार्यरत हैं। विकास के तौर पर देखें तो गांव में ग्राम पंचायत का भवन एवम एक आंगनवाड़ी भवन है।
गांव में ग्राम सचिवालय का भी शिलान्यास किया गया है लेकिन अभी वह पूर्ण रुप से मूर्त नहीं हो पाया है। यह गांव 56. 45 हेक्टेयर में फैला हुआ है । गाँव में साक्षरता दर 67.27 प्रतिशत है। पुरुषों की साक्षरता 80% और महिलाओं की साक्षरता 49.54 प्रतिशत है । परन्तु उच्च शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेज 10 से 12 किलोमीटर दूर होने के कारण महिलाओं की शिक्षा बाधित होती है। सहोदरपुर गांव की सरहद बगल के गांव बिरसादपुर , गौरीकला, कपूरपुर और शेखपुरा गाँव से लगती है। सहोदर पुर गांव में सर्वाधिक उम्रदराज व बुजुर्ग एक महिला हैं। जिनका नाम श्रीमती अभिराशि सिंह है । जो वर्तमान में 102 वर्ष की हैं । दीपावली के अवसर पर गांव में वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें अक्सर गांव से बाहर रहने वाले ग्रामवासी गाँव आने का प्रयत्न करते हैं । गाँव मे 7 शिक्षक एक चिकित्सक एक उद्योगपति भी है।
कई अवार्ड विजेता फिल्म “उड़ान” और मशहूर फिल्म “तनु वेड्स मनु” के प्रोड्यूसर नरेंद्र सिंह (संजय) का भी इसी गांव से संबंध है । करोना काल की इस महामारी और भय के वातावरण में लगभग 50 की संख्या में प्रवासी गांव वापस लौट आये थे । इस गाँव के वर्तमान ग्राम प्रधान रामपति सरोज हैं । यहां शिक्षा और रोजगार को स्थानीय ग्रामीण उनकी मुख्य समस्या मानते हैं ।
गांव में कोई औद्योगिक इकाइयां काम नहीं कर रही हैं एवम उच्च शिक्षा के लिए ग्राम वासियों को 10 से 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। जिस कारण महिलाएं शिक्षा से वंचित हो जाती हैं । विकास के तौर पर क्या किया जाना चाहिए के जवाब में स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि उनके गांव में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना एवम व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना के साथ ही एक बड़ा अस्पताल और डिग्री कॉलेज भी बनाया जाना चाहिए।
संकलन : शैलेश तिवारी सामना मुम्बई











