मछली शहर। कार्तिक मास में दीपदान करना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ शैलेश मोदनवाल के अनुसार कार्तिक मास में आकाश मंडल का सबसे बड़ा ग्रह माना जाने वाला सूर्य अपनी नीच की राशि तुला में गमन करता है। इस वजह से वातावरण में अंधकार पांव पसारने लगता है। इसलिए इस
पूरे मास में दीपक जलाने, जप, तप और दान व स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। अग्नि पुराण के अनुसार दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है, न था और न होगा ही। दीपदान से आयु और नेत्र ज्योति की प्राप्ति होती है। दीपदान से धन, पुत्रादि के साथ ही स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। जो कार्तिक मास की रात्रि में श्रद्धापूर्वक शिवजी के समीप दीपमाला समर्पित करता है, उसके चढ़ाये गए वे दीप शिवलिंग के सामने जितने समय तक जलते हैं, उतने हजार युगों तक दाता स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है। जो कार्तिक महीनेमें शिवजी के सामने घृत का दीपक समर्पित करता है, वह ब्रह्मलोक को जाता है।पद्मपुराण के अनुसार मंदिरों में और नदी के किनारे दीपदान करने से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं। दुर्गम स्थान अथवा भूमि पर दीपदान करने से व्यक्ति नरक जाने से बच जाता है। पद्मपुराण के अनुसार, जो देवालय में, नदी के किनारे, सड़क पर दीप देता है, उसे सर्वतोमुखी लक्ष्मी प्राप्त होती है। कार्तिक में प्रतिदिन दो दीपक जरूर जलाएं। एक श्रीहरि नारायण के समक्ष तथा दूसरा शिवलिंग के समक्ष जलाएं।












