प्रिय मल्हनी वासियों
मैं आप की बहू श्रीकला धनंजय बोल रही हूं
सभी बड़ो को चरण स्पर्श, और छोटो को ठेर सारा प्यार, सास जैसी माओं, ननद जैसी दोस्तों और मेरे प्यारे देवरों चुनाव के सिलसिले में मैं आप लोगों के बीच पहली बार आई हूं, बहुत से गांव और घर मे जाने के बाद आप लोगों से जो प्यार और सम्मान मिला उसको मैं शब्दो मे नही बता सकती।
मुझे भी कभी आशा नही थी कि पूर्व सांसद और मेरे पति धनन्जय सिंह को लोग इतना प्यार करते हैं, जाति और धर्म की राजनीति के समय मल्हनी की जनता उनको अपना बेटा मानती है ,जो खुश है वो भी और जो किसी कारण से दुखी है या वोट नही देना चाहता है वो भी बेटे की तरह ही मूल्यांकन करता है, मैं बहुत जगह दुःखी होने का कारण ये सुनी हूं कि धनंजय भैया मेरे घर नही आये है, ये सुनकर मन भारी हो जाता है, कौन जनता किसी को इतना प्यार करती है
कि उसको अपने घर ना पहुँच पाने के लिये दुखी हो, ये सिर्फ बेटे के लिये हो सकता है, मां ,बाप, भाई,बहन सिर्फ अपने बेटे का रास्ता देखते हैं, जिसे पूर्व सांसद धनन्जय सिंह पूरा करने का प्रयास करते हैं और करना भी चाहिए, वोट तो किसी को भी मिल जाता है, ऐसा प्यार सबको नसीब नही होता, सांसद जी भाग्यशाली हैं कि उनको पुत्रवत प्रेम मिलता है और मैं भी अपने को भाग्यशाली मानती हूं कि आप सब की बहू बनी। मैं विस्वास दिलाती हूं कि आप सब के विश्वास पे खरी उतरूंगी और प्रेम पुत्र और पुत्र बधू की ही तरह रहेगा।
इन दिनों मुझे जो अनुभव मिला उसको सोच सोच के मन खुश हो जाता है, मुझे बहुत जगहों से मुँह दिखाई में पैसा मिला है, मैं ससुराल में आई बहू की तरह यही सोचती हूँ कि इसका क्या क्या करूंगी, ये बनवाऊंगी ये बनवाऊंगी, बहुत से लोग जल्द बाजी में भूल जाते हैं, तो संदेश आता है कि–“”अरे अम्मा भूल गई, पहली बार बहू से मिली और कुछ दे नही पाई”” सुन के मन गदगद हो जाता है, मेरी सभी सासू मां और अपने से बड़ो से अनुरोध है कि मेरी मुँह दिखाई भूले ना, चाहे एक रुपया ही दे लेकिन दे जरूर उसपर मेरा हक है, वो ससुराल और आप सब का प्यार है, इन सब पैसों से मैं गले का हार बनवाऊंगी जिससे मुझे महसूस हो कि आप का प्यार मेरे दिल में है और आप सब मेरे दिल के नजदीक, वो हमेशा मुझे आप सब की याद दिलाता रहेगा।
कितने घरों में खाना खाने को मिलता है, प्यार से सब गले लग जाते हैं, इतना आशीर्वाद मिलता है, लोग कहते हैं बहू तुम क्यो आई, आराम करो,ननद जैसी दोस्त और बहने दौड़ के बाहर आ जाती हैं और गले लगती हैं तो लगता है बचपन वापस आ गया है, और अपने देवरों जैसे छोटे भाइयों के लिए क्या कहूं, शब्द ही कम पड़ जाते हैं, देख कर लगता है चारो तरफ हर लड़का स्वयं धनन्जय सिंह बन के लड़ रहा है, दिन रात बिना खाये पिये लगे हुए हैं, ये प्यार आजीवन याद रहेगा।
बाते तो बहुत है मन में, कहना भी बहुत कुछ चाहती हूं, हर घर में रुकना भी लेकिन समय कम है और जाना सब जगह है, इसलिए अगर कही नही पहुँच पा रही हूं तो माफ करियेगा आऊंगी जरूर।वैसे भी बहुओं से आशा जादा होती है, आप लोग अब अपने सांसद जी से जो नही कह पाते थे वो अपनी बहू और भाभी से कहेंगे इसका मुझे भरोसा है, और मैं ईष्वर से यह शक्ति मांगती हूं कि मैं, और मेरा परिवार आप के भरोसे पे खरे उतरे।
फिर मिलती रहूंगी, कुछ कहती रहूंगी, सब लोग आशीर्वाद की तरह लग जाइये,।
और हां मेरी मुँह दिखाई मत भूलिएगा, लूँगी जरूर, मेरी मुँह दिखाई आप का प्यार है और आपका वोट, जो मेरी पति को एक नया राजनैतिक जीवन प्रदान करेगा।
आपकी श्री कला धनन्जय सिंह ।












