मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग 29 सितंबर को देश के बाकी राज्यों में उपचुनाव की घोषणा करेगा. आयोग का तर्क है कि 3 से 4 राज्यों की तरफ से उपचुनाव के आयोजन को लेकर कुछ रिजर्वेशंस किया गया है.
लखनऊ. निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया. लोगों को उम्मीद थी कि आयोग बिहार के साथ ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनावों का भी ऐलान करेगा. इस संबंध में चुनाव आयोग ने पहले ऐलान भी किया था कि बिहार के साथ ही उपचुनाव की घोषणा होगी. लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव आयोग 29 सितंबर को देश के बाकी राज्यों में उपचुनाव की घोषणा करेगा. चुनाव आयोग का तर्क है कि 3 से 4 राज्यों की तरफ से उपचुनाव के आयोजन को लेकर कुछ रिजर्वेशंस किया गया है, इस पर बैठक के बाद 29 सितंबर को घोषणा की जाएगी.
बता दें उत्तर प्रदेश की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से 2017 के चुनाव के नतीजों के मुताबिक 6 भाजपा के पास जबकि 2 सपा के पास थीं.
5 सीटें विधायकों के निधन के कारण हुईं खाली
इन 8 सीटों में से 5 सीटें मौजूदा विधायकों के निधन के कारण खाली हुई हैं. इसमें 4 भाजपा के जबकि एक सपा के विधायक थे. दो सीटें विधायकों की सदस्यता खत्म होने के कारण खाली हुई हैं. इनमें से 1 भाजपा और 1 सपा की हैं. जबकि 1 सीट टूण्डला की सीट से विधायक एसपी बघेल के 2019 में सांसद बनने से ये सीट खाली हुई है.
यहां सत्ताधारी भाजपा ने सभी 8 सीटों पर अपना पताका फहराने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है. उसे सबसे ज्यादा जौनपुर की मल्हनी और रामपुर की स्वार सीट पर मेहनत करनी है क्योंकि अपने अस्तित्व में आने के बाद से भाजपा कभी भी इन सीटों पर नहीं जीती. दूसरी ओर सपा ने भी ताकत झोंक रखी है जिससे उसके नम्बर कम न हो. 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इन 8 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव के नतीजे काफी मायने रखेंगे.
कौन-कौन सी आठ सीटें हैं? जिन पर चुनाव होगा और अभी क्या स्थिति है, आइये जानते हैं…
1- मल्हनी, जौनपुर – जौनपुर की ये सीट बहुत अहम है. 2017 के विधानसभा चुनाव में ये सीट सपा ने जीती थी. पारसनाथ यादव यहां से विधायक थे. इनके निधन के कारण ये सीट खाली हुई है. इस सीट पर उनके बेटे लकी यादव के चुनाव लड़ने की प्रबल संभावना है. यादव और ठाकुर बाहुल्य इस सीट पर एक बड़ा फैक्टर बाहुबली धनंजय सिंह भी हैं.
2- बांगरमऊ, उन्नाव- रेप कांड में दोषी साबित कुलदीप सिंह सेंगर की सदस्यता जाने के कारण ये सीट खाली हुई है. भाजपा के कुलदीप सिंह सेंगर 2017 के चुनाव में यहां से विधायक चुने गए थे.
3- देवरिया- भाजपा के विधायक जन्मेजय सिंह के निधन के कारण ये सीट खाली हुई है.
4- स्वार, रामपुर- कम उम्र साबित होने के कारण आजम खान के बेटे अबदुल्ला आजम की सदस्यता खत्म कर दी गई थी. इसी वजह से स्वार की सीट खाली हो गई है. इस पर अब चुनाव होंगे.
5- टूण्डला, फिरोजाबाद- एसपी सिंह बघेल के भाजपा से सांसद बनने के बाद से ये सीट खाली चल रही है. पिछले साल हुए उपचुनाव में इस सीट पर चुनाव नहीं कराए जा सके थे क्योंकि मामला कोर्ट में चला गया था. अब यहां चुनाव होंगे.
6- बुलंदशहर- 2017 के चुनाव में यहां से भाजपा के वीरेन्द्र सिंह सिरोही विधायक चुने गये थे. उनके निधन के कारण ये सीट खाली हुई है. इस पर अब चुनाव होंगे.
7- घाटमपुर, कानपुर- योगी सरकार में मंत्री कमलरानी वरूण के निधन से ये सीट खाली हुई है. कोरोना संक्रमण के चलते मंत्री कमलरानी वरूण का निधन हुआ था.
8- नौंगाव सादात, अमरोहा – 2017 के चुनाव में चेतन चौहान भाजपा से विधायक चुने गये थे. योगी सरकार के दूसरे मंत्री जिनका कोरोना से निधन हुआ. मंत्री चेतन चौहान के भी निधन से सीट खाली हुई है.












