संकल्प सवेरा
निधन का समाचार आते ही पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर
जौनपुर। साहित्य पुरोधा, सद्भाव के प्रतीक, कोशिश के महान शुभ चिंतक, हर दिल अज़ीज़ मशहूर शायर आकिल साहब हमारे बीच नहीं रहे।कल की रात में उनका निधन हो गया। आप की उमर लगभग ६५ वर्ष थी। निधन का समाचार आते ही पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। l
आकिल जी की हिंदी उर्दू दोनो ही भाषाओं में बेहतरीन पकड़ थी। आप अंतर्रष्ट्रीय स्तर के शायर स्वर्गीय कामिल साहब के सक्षम उत्तराधिकारी थे। साहित्यिक सृजन के अतिरिक्त संचालन में भी उन्हें महारत प्राप्त थी। कोशिश संस्था द्वारा उन्हें आजीवन उपलब्धि सम्मान से सम्मानित भी किया गया था।
कोशिश साहित्यिक संस्था के सदस्य उनके असामयिक निधन से बहुत दुखी है। प्रो. आर. एन. सिंह, प्रो अनूप वशिष्ठ, डॉ. पी. सी विश्वकर्मा, गिरीश कुमार श्रीवास्तव, अशोक मिश्रा, प्रखर, अनिल उपाधाय, विमला सिंह, अमृत प्रकाश, राम जीत मिश्रा, मोनिस जौनपुरी, असीम मछलीशहरी, जनार्दन प्रसाद, पाषाण एवं पारुल आदि ने उन्हें इंसानियत का प्रतीक बताया। साहित्य के समवर्धन एवं साम्प्रदायिक एकता के लिए ऊनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
आकिल जी ने कई पुस्तकों की रचना एव सम्पादन भी किया है। आप कई अखबारो से भी जुड़े रहे।
ऊनके कुछ यादगार शेर हर किसी के दिलोदिमाग़ पर ताज़ा बने रहते है।” कभी सुना था ऐसा लफड़ा, गुल का है बुलबुल से झगड़ा,: कमज़ोरों को मार रहे हो, उससे निपटो जो है तगड़ा; ये भी तो जुल्मों सितम का तोड़ है, तीर खाकर मुस्कुराना चाहिए; वो नागिन इसलिए भी है परेशा, जिसे देखो सपेरा हो गया है।
ये तमाम यादगार शेर उनकी बेहतरीन सोच के प्रतीक है-अभी तो उनसे बहुत कुछ हासिल करना था, सभी को पर आकिल जी सो गए दास्ताँ कहते- कहते। सादर नमन।
प्रो आर एन सिंह
कोशिश जौनपुर












