संकल्प सेवरा
हवालेघोटालेबाजों को नोटिस जारी
जौनपुर। पूविवि के इंजीनियरिंग संस्थान में सत्र 2003-04 से 2006-07 तक के पाठ्यक्रमों में छात्रों के बकाए शिक्षण शुल्क की जांच शुरू हो गई है। करीब दो करोड़ रुपये के घपले की जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा वाराणसी ने विवि ने 12 अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस भेजा है। सभी को एक सप्ताह के अंदर वाराणसी कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा है। चार सत्रों में छात्रों से वसूली गई शुल्क में घोटाले का मामला वर्ष 2011 में उजागर हुआ था। तत्कालीन कुलपति ने प्रो. डीडी दुबे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी की जांच में स्पष्ट हुआ कि एससी-एसटी और ओबीसी के तमाम ऐसे छात्र हैं, जिनकी समाज कल्याण विभाग से शुल्क प्रतिपूर्ति आए ही उन्हें परीक्षा में बैठा दिया गया। ऐसे छात्रों की सूची तैयार करने को कहा गया। कुलपति के आदेश पर दूसरी कमेटी चार फरवरी 2013 को नामित की गई। इसमें 2003-04 से 2006-07 तक बीटेक एवं एमसीए के पाठ्यक्रमों में शिक्षण शुल्क नहीं जमा होने से हुए नुकसान का आकलन करते हुए जिम्मेदारों को चिह्नित करते हुए उत्तरदायित्व निर्धारित करने की बात कही गई। जांच में बीटेक से संबंधित सभी सात बैचों की पूर्ण अवधि और एमसीए के सभी 6 बैचों में से केवल 4 बैचों की पूर्ण पाठ्यक्रम अवधि में बीटेक के छात्रों से शिक्षण शुल्क न जमा किए जाने के कारण विवि को एक करोड़ 90 लाख 44 हजार 2 सौ में से 54.79 लाख रुपये के लिए श्याम त्रिपाठी, 21.64 लाख के लिए केशव प्रसाद और 1.14 करोड़ 14 लाख 1 हजार के लिए श्याम त्रिपाठी और रामसेवक यादव को जिम्मेदार बताया गया था। इसी प्रकार एमसीए शिक्षण शुल्क नहीं जमा किए जाने से विवि को 10 लाख 91 हजार में से 9 लाख 10 हजार 5 सौ के लिए श्याम त्रिपाठी और 1 लाख 80 हजार 5 सौ रामसेवक यादव जिम्मेदार प्रतीत होते है। छात्र शुल्क पंजिका में प्रविष्टियॉ इन्हीं सहायकों व प्रभारियों ने किया था। विवि ने कमेटी के निर्णय को शासन को भेजा दिया। शासन ने एसपी आर्थिक अनुसंधान संगठन (ईओडब्लू) शाखा वाराणसी को जांच के लिए निर्देशित किया है। ईओडब्लू के निरीक्षक मोहन राम ने विवि के संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों को नोटिस भेजकर एक सप्ताह के अंदर कार्यालय में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है। नोटिस पहुंचने के बाद विवि में हड़कंप मच गया है।












