राजीव पाठक
sankalp savera जौनपुर।कानपुर में गुरुवार की रात हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गयी पुलिस टीम पर हमला कर 8 पुलिस कर्मियों की दुस्साहसिक हत्याकांड के बाद एक तरफ जहाँ पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है तो वही जनपद में भी ऐसे तमाम हिस्ट्रीशीटरो को लेकर चर्चायें तेज हो गईं हैं कि जौनपुर में भी ऐसे कई “विकास दुबे” राजनैतिक व पुलिसिया विभीषण के संरक्षण में अपना जरामय का व्यवसाय बखूबी चला रहे है,क्या इन पर भी कोई कार्यवाही होगी?
जौनपुर की धरती पर भी कई ऐसे ही दुस्साहसीक मुठभेड़ की घटनाएं घटित हो चुकी है जिसमे पुलिस पर भारी पड़े बदमाशों की गोली से कई पुलिस वालों का खून इस धरती को लाल हो चुका है।जिले में भी शातिर अपराधियो,हिस्ट्रीशीटर,पशु व शराब तस्करों से पुलिस का हमेशा आमना सामना होता रहता है।कई मामलों में तो पुलिस वाले बदमाशों को पकड़ कर सलाखों के पीछे पहुचाने में सफल हो जाते हैं।वहीं कई मामलों में पुलिस टीम को ही मुंह की खानी पड़ गयी तो कई मामलों में पुलिस के जवानों को कानून को बचाने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ गयी।चार वर्ष पूर्व ऐसे ही मामले में नगर के बदलापुर पड़ाव पर पशु तस्करों ने एक दरोगा को वाहन से रौंद कर मार डाला था।आंकड़ो पर गौर करें तो जिले में इस समय कुल 1112 हिस्ट्रीशीटर चिन्हित है।जिसमे से महज 82 ही सलाखों के पीछे है।जबकि अधिकांश आज भी डंके की चोट पर अपराध को अंजाम दे रहे हैं।
लेकिन इन सबके बीच बड़ी बात यह है कि इन अपराधियों के हौसले इतने कैसे बढ गये हैं।कहना गलत नही है कि अपराधियों को राजनैतिक सरंक्षण तो प्राप्त है ही साथ मे पुलिस विभाग में बैठे जयचन्द और विभीषण अपने सहकर्मियों के लिए काल साबित हो रहे हैं।ऐसे में इन हिस्ट्रीशीटर पर लगाम लगाने के साथ ही इन घर के भेदियो को भी ढूंढ कर निकलना जरूरी है।
जौनपुर।थाना लाइन बाजार क्षेत्र के सैदनपुर निवासी बालालखन्दर यादव थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी व भू माफिया है।इसका छोटा भाई जितेंद्र यादव भी भू माफिया है।ये दोनों भाई प्रायः धमेंद्र यादव व राजू नामक व्यक्ति के नाम सम्पत्ति खरीदते हैं।ये दोनों भ्रस्ट अधिकारियों को मिलाकर सार्वजनिक संपत्ति पर अपने करीबी लोगों का नाम दर्ज कराकर उसे बेचते हैं।सूत्रों की मानें तो आपराधिक स्रोत से इन लोगो ने अथाह सम्पत्ति अर्जित की है परंतु प्रशासन में भरष्टाचार के कारण इनकी सही जांच नही हो पाती।बाला लखन्दर के विरुद्ध थाना लाइन बाजार में सरकारी बस लूटने का मुकदमा दर्ज है।इसमें 27 वर्षों बाद भी सरकार की ओर से गवाही तक शुरू नहीं कराई जा सकी।इसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नही है।












